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Showing posts from July, 2018

सावधान! इस 'भीड़' से खतरा है

ये भीड़ अब कुछ अलग - सी है , इसकी फिज़ा अब कुछ अनजान - सी है | चेहरे तो कुछ जान पहचाने है , पर इसकी ये फितरतें कुछ खतरनाक - सी है | पहले भीड़ मिला करती थी मेलों में , किसी बड़ी सभा या बस तो कभी रेलों में | पर आज की ये भीड़ अब वो न रही , ये बन गई है सूचक हवादिस की | झूठ के फैले जाल में फंसकर , इस भीड़ ने न जाने कितनों को भयंकर मौत दी | ये भीड़तंत्र हमारे लोकतंत्र को दीमक की भांति खोखला कर रहा है , और हमारा " नेता समाज " इसके शिकार के लहू से अपनी कुर्सी चमका रहा है | ये भीड़ है तभी अपराधी होकर भी अपराधी नहीं , ये भीड़ है तभी इससे कोई बच पाता नहीं | दम निकलने तक घेरकर मारती है ये , फिर अपने ही हैवानियत के सबूत को वायरल बनाती है ये | कहाँ से बनती है ये भीड़ , ये न पूछो दोस्तों , तुम्हारे और हमारे बीच से ही ये बनती भीड़ है , तुम्हारे और हमारे बीच से ही ये बनती भीड़ है |

तू अकेला नहीं

यकीन रख , तू अकेला नहीं | इतमिनान रख , तू तन्हा नहीं | वक्त की गर्दिशें है बस ये , यूं विश्वास रख कि तू अभी हारा नहीं | तेरी सलाहियतें * अभी बहुत है , तेरी काबिलियत भी तो खूब है | संघर्षरत होकर ही यूं आज के अश्क * को अपने कल के शम - ए - मसर्रतों * में , तब्दील कर तू | 1. सलाहियतें :- सामर्थ्यता 2. अश्क :- आंसू 3. शम - ए - मसर्रत :- खुशियों का दीपक