सावधान! इस 'भीड़' से खतरा है
ये भीड़ अब कुछ अलग - सी है , इसकी फिज़ा अब कुछ अनजान - सी है | चेहरे तो कुछ जान पहचाने है , पर इसकी ये फितरतें कुछ खतरनाक - सी है | पहले भीड़ मिला करती थी मेलों में , किसी बड़ी सभा या बस तो कभी रेलों में | पर आज की ये भीड़ अब वो न रही , ये बन गई है सूचक हवादिस की | झूठ के फैले जाल में फंसकर , इस भीड़ ने न जाने कितनों को भयंकर मौत दी | ये भीड़तंत्र हमारे लोकतंत्र को दीमक की भांति खोखला कर रहा है , और हमारा " नेता समाज " इसके शिकार के लहू से अपनी कुर्सी चमका रहा है | ये भीड़ है तभी अपराधी होकर भी अपराधी नहीं , ये भीड़ है तभी इससे कोई बच पाता नहीं | दम निकलने तक घेरकर मारती है ये , फिर अपने ही हैवानियत के सबूत को वायरल बनाती है ये | कहाँ से बनती है ये भीड़ , ये न पूछो दोस्तों , तुम्हारे और हमारे बीच से ही ये बनती भीड़ है , तुम्हारे और हमारे बीच से ही ये बनती भीड़ है |